UP Anganwadi News: आंगनबाड़ी भर्ती घोटाला ! फतेहपुर की सुपरवाइजर पर दर्ज हुई एफआईआर, जाने पूरा मामला
Fatehpur News In Hindi
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के फतेहपुर (Fatehpur) में आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की भर्ती घोटाले में जिला प्रशासन से सख्त रुख अपनाते हुए सुपरवाइजर विमला शर्मा के खिलाफ थरियांव थाने (Thariyao Thana) में मुकदमा दर्ज कराया है.

Fatehpur Anganwadi Bharti: यूपी के फतेहपुर जिले में 353 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की भर्ती में बड़ा घोटाला सामने आया है. भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही अनियमितताओं की शिकायतें आने लगीं, लेकिन मामला तब तूल पकड़ गया जब एक सनसनीखेज ऑडियो वायरल हुआ.
इस ऑडियो में हसवा ब्लॉक की सुपरवाइजर विमला शर्मा खुलेआम रिश्वत मांगते हुए सुनी जा सकती हैं. उन्होंने न केवल पैसे की मांग की, बल्कि यह भी बताया कि यह रकम ऊपर तक जानी है.
मामला सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया और डीएम ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सुपरवाइजर के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई, वहीं 25 से अधिक भर्ती घोटाले की शिकायतों की जांच शुरू कर दी गई है.
कैसे खुला भर्ती घोटाले का राज?
26 मार्च को जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भर्ती सूची जारी की गई थी. 353 पदों पर हुई इस भर्ती में मेरिट लिस्ट में गड़बड़ी और अपात्र लोगों के चयन की शिकायतें आने लगीं. पहले प्रशासन ने इसे सामान्य मान लिया, लेकिन जब एक आवेदिका के पति अरविंद कुमार तिवारी ने रिश्वत मांगने का ऑडियो सबूत के तौर पर पेश किया, तो मामला विस्फोटक हो गया.
ऑडियो में साफ सुना जा सकता है कि हसवा ब्लॉक की सुपरवाइजर विमला शर्मा आवेदिका अक्षिता देवी के पति से नौकरी पक्की करने के बदले पैसों की मांग कर रही हैं. दिलचस्प बात यह है कि वह सिर्फ अपने लिए ही नहीं, बल्कि ‘ऊपर के अधिकारियों’ के लिए भी हिस्सा मांग रही हैं. इस खुलासे ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.
सुपरवाइजर पर FIR दर्ज, भर्ती प्रक्रिया की जांच शुरू
जिला कार्यक्रम अधिकारी साहब यादव ने बताया कि अब तक 25 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं और इनकी गहन जांच की जा रही है. गलत तरीके से चयनित उम्मीदवारों की सूची भी बनाई जा रही है और जल्द ही उन पर कार्रवाई होगी.
वहीं, वायरल ऑडियो के आधार पर हसवा ब्लॉक की सुपरवाइजर विमला शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत थरियांव थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.
एफआईआर के अनुसार, सुपरवाइजर ने आवेदिका के पति अरविंद कुमार तिवारी से कहा— ‘सोच रही हूँ कि इतना दूर से भाग कर आए हो तो मैंने बुलाया है, कोई खाली ना जाए...’ इसके बाद उन्होंने अधिकारियों के नाम पर पैसे मांगे.
क्या प्रशासन इस घोटाले की जड़ तक पहुंचेगा?
इस घोटाले ने सरकारी भर्तियों की निष्पक्षता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर रिश्वतखोरी के दम पर चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुंचेगा? क्या इसमें शामिल बड़े अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी, या फिर मामला कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
सोशल मीडिया पर इस घोटाले को लेकर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है. लोग कह रहे हैं कि अब योग्यता नहीं, जेब की गहराई तय करती है कि कौन चुना जाएगा. तो कोई लिख रहा है, यह भ्रष्टाचार नहीं, सिस्टम का अपग्रेडेड वर्जन है—जहां बिना रिश्वत कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती.