Navratri Paran Kab Hai 2025: चैत्र नवरात्र में पारण कब है? जानिए शुभ मुहूर्त और सटीक डेट
Chaitra Navratri 2025
चैत्र नवरात्रि 2025 का समापन राम नवमी पर होगा, जिसके बाद श्रद्धालु व्रत का पारण करेंगे. गोविंद शास्त्री जी और विभिन्न पंचांगों के अनुसार पारण अष्टमी, नवमी या दशमी को किया जा सकता है. पारण शांत मन से, सूर्योदय के बाद और परंपरा अनुसार करना शुभ माना गया है.

Chaitra Navratri Paran 2025: चैत्र नवरात्र का पावन पर्व अपने अंतिम चरण में है. मां दुर्गा के नौ दिवसीय अनुष्ठान के समापन के साथ ही व्रत रखने वाले श्रद्धालु अब पारण तिथि यानी व्रत तोड़ने के शुभ समय को लेकर जिज्ञासा है.
सही पारण का समय और विधि न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. आइए जानते हैं पंडित गोविंद शास्त्री और अन्य पंचांगों का दृष्टिकोण.
चैत्र नवरात्रि 2025 कब से कब तक?
- आरंभ: 30 मार्च 2025, रविवार
- राम नवमी (नवम दिन): 6 अप्रैल 2025, रविवार
- समापन: 7 अप्रैल 2025, सोमवार (दशमी तिथि)
गोविंद शास्त्री के अनुसार व्रत पारण का सही समय
प्रख्यात पंडित गोविंद शास्त्री जी के अनुसार, नवरात्रि व्रत का पारण करते समय श्रद्धा, शुद्धता और सही चरण का विशेष ध्यान रखना चाहिए. पारण के लिए दिन का उपयुक्त मुहूर्त देखना चाहिए जब शरीर और मन दोनों शांत हों. देवी के ध्यान के साथ व्रत का समापन सर्वोत्तम माना गया है.
- जो श्रद्धालु पूरे 9 दिन व्रत रखते हैं, उन्हें नवमी तिथि में पारण करना हो, तो चतुर्थ चरण का समय उत्तम माना गया है.
- विशेष पारण मुहूर्त: 6 अप्रैल 2025 को शाम 5:36 बजे से 6:15 बजे के बीच.
- लेकिन यदि कोई नवमी को भी व्रत रखता है, तो उसे 7 अप्रैल को दशमी तिथि में सूर्योदय के बाद पारण करना चाहिए.
शास्त्री जी स्पष्ट कहते हैं कि पारण केवल समय का पालन नहीं, श्रद्धा और शुद्धता का भी विषय है.
अन्य पंचांगों के अनुसार पारण की मान्यताएं
1. निर्णय सिन्धु (धार्मिक ग्रंथ) के अनुसार:
व्रत पारण नवमी की पूर्णता के बाद, यानी दशमी तिथि में किया जाना उत्तम है.यह विशेष रूप से उन श्रद्धालुओं पर लागू होता है, जो नौ दिन निरंतर व्रत रखते हैं.
2. पंचांग आधारित तिथियां:
- नवमी तिथि प्रारंभ: 5 अप्रैल 2025, शनिवार शाम 7:26 बजे
- नवमी समाप्त: 6 अप्रैल 2025, रविवार शाम 7:22 बजे
- दशमी तिथि प्रारंभ: 6 अप्रैल की शाम से
- पारण तिथि: 7 अप्रैल 2025, सोमवार
- पारण का शुभ समय: सुबह 6:04 बजे के बाद
स्थानीय विचार के अनुसार पारण
- कई क्षेत्रों में अष्टमी को व्रत रखते हैं और नवमी को कन्या पूजन के साथ व्रत पारण करते हैं.
- दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में नवमी तिथि में ही व्रत समाप्त कर दिया जाता है.
व्रत पारण की विधि (Paran Vidhi)
- प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
- देवी का ध्यान कर उन्हें फल, फूल, धूप-दीप, नैवेद्य अर्पित करें.
- घर में कन्या पूजन करें और उन्हें भोजन व दक्षिणा दें.
- पारण के समय शांत, एकाग्र और सात्विक मन रखें.
- पारण के बाद देवी से कृतज्ञता और आशीर्वाद प्राप्त करें.
कन्या पूजन का विशेष महत्व
नवरात्रि के अंतिम दिन 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजन किया जाता है.इन्हें खीर, हलवा, पूरी, चने का भोग लगाकर श्रद्धापूर्वक भोजन कराया जाता है. यह अनुष्ठान नारी शक्ति और शुद्धता का प्रतीक है.